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Sunday, 7 July 2019

पोस्ट लंबी लग सकती है पर पड़ना तो पड़ेगा क्योंकि बात शिक्षकों के आत्मसम्मान की है, क्योंकि हर बार गलती किसी और कि होती है पर बदनामी शिक्षक उठाता है- : Rajeev Gupta


पोस्ट लंबी लग सकती है पर पड़ना तो पड़ेगा क्योंकि बात आत्म सम्मान की है।

सभी मित्रों सुभचिंतको को सादर नमस्कार- मित्रों जैसे कि कल से एक खबर घूम रही है कि सरकार विद्यालय टाइम में  सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा रही है मैं सरकार के इस आदेश का हार्दिक स्वागत करता हूँ।

जैसा कि सभी शिक्षक साथियों को पता है कि एक अजीब सा माहौल बनाया जा रहा है शिक्षको के प्रति की शिक्षक पढ़ाता ही नही दिन भर फोन में लगा रहता है हर कोई शिक्षक के पीछे पड़ा है पर वास्तविकता कोई देखना ही नही चाहता बस कह दिया कि शिक्षक फोन में लगा रहता है पर कोई ये नही देखना चाहता कि क्यों लगा रहता है आप सबको पता है कि ज्यातर सूचनाएं और आदेश सोसिलमीडिया के द्वारा ही भेजे जा रहे है तो बिना फोन इस्तेमाल किये कैसे सूचनाएं दी जाएगी काम विभाग का और आरोप शिक्षक पर।


एक तो अपने फोन से विभाग का कार्य भी करिये ऊपर से बदनामी भी झेलिये की शिक्षक फोन में लगा रहता है तो आइए हम स्वयं विद्यालय के समय मे स्मार्ट फोन का इस्तेमाल बन्द कर दे हो सके तो स्मार्ट फोन ले कर ही न जाएं और आपको कोई बाध्य भी नही कर सकता।

हर बार गलती किसी और कि होती है पर बदनामी शिक्षक उठाता है जैसे-

👉शिक्षक ट्रेनिंग के लिए brc गया तो समाज सोचता है कि फला मास्टर तो स्कूल ही नही आ रहा।

👉पुस्तक लेने brc गए तो मास्टरवा तो 10 बजे ही घर जा रहा था।
👉राशन लेने कोटेदार के यंहा गए तो मास्टरवा तो बाजार घूमत रहा।
👉 हस्ताक्षर कराने प्रधान जी के पास गए तो मास्टरवा तो दिन भर परधानवा के घर पर चौकीदारी करता है।

👉 अगर mdm की सब्जी फल लेने में 15 मिनट देर हो जाये तो मास्टरवा तो देर से आवत है।

👉 अगर एक शिक्षक बैठ कर सूचना बनाये तो मास्टरवा तो दिन भर बैठ के आपन काम करता है।

👉 फोन से सूचना भेजे या ले तो मास्टरवा तो फोन में लगा रहता है।
जूता मोजा किताब बैग न जाने क्या क्या लेने जाते दिखे नही की गाली शुरू की या देखो अभी ही चल दिया घर। सबको जाता हुआ मास्टरवा तो दिखता है पर समान लाद कर स्कूल आते हुए नही दिखता।

कुल मिला कर हर किसी को कमी दिखती है पर उसके पीछे की सच्चाई कोई नही देखना चाहता की मास्टरवे की क्या समस्या है मास्टरवे कि भी तो कोई सुन ले।

हर कोई बेशिक की स्कूलों की तुलना कान्वेंट से करता है पर तुलना अधूरी करता है- कितने कान्वेंट स्कूल ऐसे है जंहा 5 क्लास पर 2 शिक्षक हो और वही सारी जिम्मेदारी स्कूल खोलने, सफाई, mdm, पुस्तक वितरण, जूता वितरण, ड्रेस वितरण जैसी तमाम जिम्मेदारी निभाते हुए भी बढ़िया चल रहे हो ईमानदार से अपने अगल बगल देखिये 1 भी ऐसा कान्वेंट नही मिलेगा जंहा 5 क्लास पर 2 या 3 शिक्षक मिले हर क्लास का एक शिक्षक है। बेशिक में ही देख लीजिए इंग्लिश मीडियम स्कूल खुले हर क्लास को एक शिक्षक मिला और परिणाम सामने है बेशिक के इंग्लिश स्कूल कान्वेंट स्कूल को मात दे रहे हैं।

आज बेसिक के स्कूल शिक्षा के नही प्रयोग और अनुदान के केन्द्र बनते जा रहे है जंहा कार्य सुधार के लिए नही दिखावे के लिए किए जा रहे है और दोष शिक्षक पर लगा दिए जाते है।

अंत मे आप सभी शिक्षकों से अपील है कि विद्यालय के समय मे सोसिलमीडिया से दूरी बना ले और पूरे मनोयोग से अपना पूरा समय शिक्षण कार्य को दें तो आपके सम्मान के लिए बेहतर होगा अन्यथा बस बदनामी के साथ एक दिन नकारा घोषित कर 50 साल की आयु में बिना पेंशन के निकाल दिए जाएंगे।

पोस्ट लंबी लग सकती है पर पड़ना तो पड़ेगा क्योंकि बात शिक्षकों के आत्मसम्मान की है, क्योंकि हर बार गलती किसी और कि होती है पर बदनामी शिक्षक उठाता है- : Rajeev Gupta Rating: 4.5 Diposkan Oleh: naukari salution

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