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Monday, 5 November 2018

68500 शिक्षक भर्ती: अफसरों की चूक का खामियाजा भुगतने को मजबूर हुए अभ्यर्थी, बदलाव को कोर्ट ने नहीं माना, अधिकांश शिक्षामित्र सहित दो तिहाई अभ्यर्थी परीक्षा करते पास

68500 शिक्षक भर्ती: अफसरों की चूक का खामियाजा भुगतने को मजबूर हुए अभ्यर्थी, बदलाव को कोर्ट ने नहीं माना, अधिकांश शिक्षामित्र सहित दो तिहाई अभ्यर्थी परीक्षा करते पास


प्रयागराज : परिषदीय स्कूलों की 68500 सहायक अध्यापक भर्ती की लिखित परीक्षा में जिस उत्तीर्ण प्रतिशत को मान्य करने की मुहिम छिड़ी है, उसे योगी सरकार ने ही लागू किया था। लिखित परीक्षा के ठीक पहले घोषित उत्तीर्ण प्रतिशत में 10 से 12 प्रतिशत की कमी इसीलिए की गई थी, ताकि शिक्षामित्र सहित अधिकांश अभ्यर्थी प्राथमिक शिक्षक बन सकें। आवेदन लेने के बाद व परीक्षा के पहले हुए इस बदलाव को कोर्ट ने नहीं माना, वरना भर्ती की तस्वीर बदल जाती।
शिक्षक भर्ती के लिए नौ जनवरी को जारी शासनादेश में सामान्य-ओबीसी 45 व एससी-एसटी 40 फीसदी अंक का उत्तीर्ण प्रतिशत तय हुआ। भर्ती शिक्षामित्रों का समायोजन रद होने से खाली सीटों के लिए हो रही थी और शिक्षामित्र इस उत्तीर्ण प्रतिशत से सहमत न थे। सरकार ने उनकी मांग पर 21 मई को जारी आदेश में उत्तीर्ण प्रतिशत 10 से 12 फीसदी कम कर दिया। ज्ञात हो कि उसमें सामान्य-ओबीसी 33 व एससी-एसटी 30 फीसदी तय किया गया। इसी आधार पर 27 मई को लिखित परीक्षा हुई। रिजल्ट आने से पहले हाईकोर्ट में उत्तीर्ण प्रतिशत घटाने को चुनौती दी गई। कोर्ट ने आवेदन के बाद हुए बदलाव को नहीं माना, तब 13 अगस्त को रिजल्ट फिर 45 व 40 उत्तीर्ण प्रतिशत के आधार पर जारी हुआ।

परीक्षा नियामक कार्यालय की मानें तो कोर्ट में उत्तीर्ण प्रतिशत को चुनौती न दी जाती तो 33 व 30 फीसदी उत्तीर्ण प्रतिशत के आधार पर करीब 75 हजार अभ्यर्थी परीक्षा में पास होते। इससे भर्ती की सारी सीटें भर जाती और कुछ अभ्यर्थी बाहर होते। यही नहीं, लिखित परीक्षा के लिए 34311 शिक्षामित्रों ने आवेदन किया था, उनमें से महज 7224 ही उत्तीर्ण हो सके हैं। संशोधित उत्तीर्ण प्रतिशत लागू होने पर अधिक संख्या में शिक्षामित्र सफल होते। वहीं रिजल्ट आने के बाद से लेकर अब तक भर्ती को लेकर जो विरोध-प्रदर्शन हो रहा है, उसकी भी नौबत न आती।
60 प्रतिशत पर हुआ था मंथन
शिक्षा विभाग के अफसर पहले शिक्षक भर्ती का उत्तीर्ण प्रतिशत भी टीईटी की तरह 60 फीसदी रख रहे थे। उनकी दलील थी कि पहली से दूसरी परीक्षा कठिन होनी चाहिए, तभी उसका मतलब है। उत्तीर्ण प्रतिशत कम नहीं किया जाए। शासन इससे सहमत नहीं हुआ। अफसरों से चूक यह हुई कि जो नियम शासनादेश में होना चाहिए था, उसे संशोधित आदेश में लागू किया गया।

68500 शिक्षक भर्ती: अफसरों की चूक का खामियाजा भुगतने को मजबूर हुए अभ्यर्थी, बदलाव को कोर्ट ने नहीं माना, अधिकांश शिक्षामित्र सहित दो तिहाई अभ्यर्थी परीक्षा करते पास Rating: 4.5 Diposkan Oleh: C2S HUB

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