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Sunday, 12 August 2018

आंदोलन को नहीं, शिक्षामित्रों की मदद को बनाया संगठन: शिक्षामित्र, रसोइयों की मदद के लिए आगे आए शिक्षक

आंदोलन को नहीं, शिक्षामित्रों की मदद को बनाया संगठन: शिक्षामित्र, रसोइयों की मदद के लिए आगे आए शिक्षक


प्रदेश सरकार शिक्षामित्र के निधन हो जाने पर कोई मदद नहीं करती है तो उनके परिवार के सामने आर्थिक समस्या उत्पन्न हो जाती है। इस स्थिति को देखते हुए सम्भल के गांव गुलालपुर जाटो वाला स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य अशोक कुमार ने उनकी मदद के लिए सामाजिक कल्याण संगठन बनाया है। इन संगठन में सरकारी स्कूलों में तैनात शिक्षकों को शामिल किया गया है। संगठन शिक्षामित्रों के असामयिक निधन हो जाने पर नकद धनराशि देकर मदद कर रहा है। अब तक दो शिक्षामित्रों के निधन पर उनके परिजनों को 96 हजार रुपये की धनराशि मदद के रूप में दी चुकी है।
जिले में शिक्षामित्रों व शिक्षकों की संख्या भी 2400 के करीब है। इसमें से तमाम ऐसे शिक्षा मित्र हैं जिनके निधन के बाद सरकार से कोई मदद नहीं मिलती है। ऐसे शिक्षा मित्र या ऐसे शिक्षक जो पेंशन पाने की श्रेणी में नहीं आते हैं। उनके असामयिक निधन पर जिले के शिक्षक अशोक कुमार अध्यापक मझरा गुलालपुर जाटो वालों ने शिक्षक कल्याण संगठन की स्थापना की है। इस संगठन में सरकारी विद्यालयों में तैनात शिक्षक- शिक्षिकाओं को जोड़ा गया है। अब तक संगठन में 200 शिक्षक जुड़ चुके है। यह संगठन अपनी मांगों को लेकर आंदोलन का काम नहीं करेगा। इस संगठन ने पूर्व में गांव दतावली निवासी धीरज सिंह शिक्षामित्र के निधन पर परिजनों को 41 हजार रुपये व सम्भल विकास खंड क्षेत्र के गांव सीतापुरी निवासी राजेंद्र सिंह के निधन पर पत्नी को 55 हजार रुपये की मदद दी। यह मदद इनकी अकेले की नहीं है। जो कारवां शुरू किया उसमें शामिल शिक्षक अजय कुमार, सचिन कुमार, प्रदीप सिंह, रुकमेश सिंह, बसंत कुमार, सारिका शर्मा, मोहम्मद उमर, नईम अहमद, नरेंद्र कुमार शर्मा, अमित राहल, हरिओम शर्मा, अमित त्यागी, महेंद्र सिंह, रविकांत त्यागी, प्रमोद त्यागी, धर्मेद्र वर्मा, अनुज शर्मा, मोहम्मद अमजद, खड़क सिंह विशेष योगदान दे रहे है। संगठन के पदाधिकारियों को शिक्षामित्र के निधन हो जाने की जानकारी मिलती है तो संगठन के अध्यक्ष वाट्स एप पर अपने संगठन के ग्रुप में संदेश डालते हैं जिसके बाद प्रत्येक सदस्य से 200 से 500 रुपये एकत्र करने के लिए कहा जाता है। उनका कहना है कि शिक्षामित्र भी उनके ही साथी है। सरकार मदद नहीं करती तो हमारा मदद करने का दायित्व है।
  • शिक्षामित्र, रसोइयों की मदद के लिए आगे आए शिक्षक
  • दो शिक्षामित्रों के निधन पर दी थी 96 हजार रुपये की मदद

हम लोग अपने लिए तो सब कुछ करते ही है लेकिन हमें इससे हटकर दूसरों के लिए भी कुछ करना चाहिए। ईश्वर ने हम इस लायक बनाया है, तो हमें दूसरों की मदद करनी चाहिए। इसीलिए मैंने अपने साथी शिक्षकों के साथ मिलकर एक संगठन बनाया है। जिसका उद्देश्य शिक्षामित्र व रसोइयों की मदद करना है। शिक्षक के निधन के बाद तो सरकार से मदद मिलती ही है लेकिन शिक्षामित्रों को मदद के रूप में कुछ नहीं मिल पाता। ऐसे में उनके परिवार के सामने आर्थिक संकट पैदा हो जाता है।
अशोक कुमार, अध्यक्ष शिक्षक कल्याण संगठन

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