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Sunday, 25 March 2018

वायरल झूठ बनाम हकीकत शिक्षामित्र (Viral lie vs realism education):- शिक्षामित्र मामले में लगातार देश को गुमराह कर रही है योगी सरकार, आकाश सिंह की कलम से

वायरल झूठ बनाम हकीकत शिक्षामित्र (Viral lie vs realism education):- शिक्षामित्र मामले में लगातार देश को गुमराह कर रही है योगी सरकार, आकाश सिंह की कलम से

आइए आप सभी को बताते हैं शिक्षामित्र मामले का पूरा सच आखिर क्या है और उनकी समस्याएं और कौन कह रहा है सच और कौन बोल रहा है सफेद झूठ।
जी हां मैं आकाश सिंह आप सभी के बीच में हाजिर हूं शिक्षामित्र मामले को लेकर के जिस पर राज्य सरकार द्वारा लगातार मीडिया और देश को गुमराह किया जा रहा है आइए जानते हैं योगी सरकार का वायरल छूट बनाम हकीकत।
500 से अधिक शिक्षा मित्र आर्थिक तंगी समस्या बेरोजगारी समय से मानदेय ना मिलने के कारण अपनी जीवन लीला समाप्त कर चुके हैं उनकी समस्याओं को उठाने पर लगातार योगी सरकार के माध्यम से इतना ही जवाब दिया जाता है कि हमने उनका मानदेय 3500 से बढ़ाकर के 10000 कर दिया है लेकिन आपको जानकर के हैरानी होगी कि यह दिया जा रहा बयान पूरी तरीके से झूठ के पुलिंदे पर टिका हुआ है। शिक्षामित्रों को किसी भी प्रकार की कोई रियायत और किसी भी प्रकार की कोई सहानुभूति नहीं मिली है इस योगी सरकार से।
आइए जानते हैं आखिर पूरा सच है क्या आखिर क्यों देश को पूरी तरीके से गुमराह कर रही है योगी सरकार क्यों सच से भाग रही है पूर्ण बहुमत की सरकार?
उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत लगभग 172000 शिक्षामित्र कार्य करते हैं इनमें दो प्रकार के शिक्षामित्र थे-
एक लाख सैंतीस हज़ार समायोजित शिक्षामित्र- ये वे शिक्षामित्र थे जिनको तत्कालीन अखिलेश सरकार ने एनसीटीई द्वारा निर्धारित मानक स्नातक + 2 वर्षीय बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत सहायक अध्यापक पद पर नियोजित कर दिया गया था इन्हें सहायक अध्यापक समान सुविधा व सैलरी मिल रही थी।
दूसरे प्रकार के शिक्षामित्र लगभग 32000 ऐसे थे जिनका समायोजन सहायक अध्यापक पद पर जनपदों में सीट की अल्पता के कारण नहीं हो सका था था ऐसे शिक्षामित्रों को मिलते थे ₹3500 मात्र।
इन 32,000 शिक्षामित्रों ने अपना मानदेय बढ़ाने के लिए अखिलेश सरकार में कई बार आंदोलन का सहारा लिया जिसके फल स्वरुप तत्कालीन राज्य सरकार ने दो बार केंद्र को इनका मानदेय 10000 किए जाने की भेजी थी संस्तुति।
लेकिन तत्कालीन केंद्रीय सरकार ने राजनीतिक विद्वेष के कारण दोनों बार सपा सरकार की इस संस्तुति को किया था खारिज।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह ₹10000 का प्रस्ताव मात्र ऐसे शिक्षामित्रों के लिए था उन 32000 शिक्षामित्रों के लिए था जो ₹3500 पा रहे थे ना कि उन शिक्षामित्रों के लिए था जो कि ₹40000 सहायक अध्यापक की भाँति पा रहे थे।
30 मार्च 2017 जी हां ध्यान देने वाली बात है 30 मार्च 2017 को ही इन 32000 असमायोजित शिक्षामित्रों का मानदेय केंद्र सरकार ने निर्धारित कर दिया था ₹10000।
समझिए योगी सरकार का सबसे बड़ा झूठ-
₹10000 का प्रस्ताव केंद्र सरकार से पास हो जाता है 30 मार्च 2017 को जबकि शिक्षामित्रों के संबंध में निर्णय आता है सुप्रीम कोर्ट से 25 जुलाई 2017 को इसका सीधा सीधा अर्थ है योगी सरकार ने किसी भी प्रकार का कोई भी राहत उन शिक्षा मित्रों को नहीं प्रदान की जो कि ₹40000 पर कार्य कर रहे थे जिनकी संख्या थी 137000  .
आइए और बताते हैं आपको योगी सरकार का एक और कोरा सफेद झूठ-
करीब 45000 शिक्षा मित्र ऐसे हैं जो वर्तमान समय में केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किए गए सहायक अध्यापक के मानकों को पूरी तरह पूर्ण करते हैं,
पड़ोसी राज्य सरकार उत्तरांचल ने ऐसे शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के पद पर नियोजित करते हुए उनके जीवन को पूरी तरह से सुरक्षित कर दिया है।
लेकिन वर्तमान उत्तर प्रदेश राज्य सरकार ने ऐसी किसी भी कदम को उठाकर की शिक्षामित्रों को राहत देने का कोई भी प्रयास नहीं किया और बल्कि एक कोरा झूठ बोलते रहे कि हमने उनके मानदेय को बढ़ा दिया है जबकि ₹10000 का मानदेय मात्र उन कुछ शिक्षा मित्रों के लिए था जो कि नियोजित नहीं हो पाए थे।
यहां एक यह भी प्रश्न उठता है कि शिक्षामित्र प्रकरण का न्यायिक समाधान करने का वादा करने वाली केंद्र सरकार शिक्षामित्र प्रकरण की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए किसी भी प्रकार का एक कानून ला कर के उनके जीवन को सुरक्षित कर सकती थी लेकिन राजनीतिक विद्वेष के कारण ना ही किसी भी प्रकार का कानूनी सहयोग उन्हें प्रदान किया गया और ना ही उत्तरांचल की भांति पूर्ण योग्यताधारी मानकों को पूर्ण  करने वाले शिक्षामित्रों मित्रों को उत्तरांचल की भांति कोई त्वरित लाभ प्रदान किया गया।
मानवता को शर्मसार करने की हद का स्तर यह है कि 500 शिक्षामित्रों की मृत्यु होने के पश्चात भी राज्य सरकार और केंद्र सरकार केवल राजनीतिक विद्वेष की भावनाओं के साथ शिक्षा मित्रों के  साथ मे सौतेला व्यवहार कर रही हैं।
*अगली पोस्ट में आपको अवगत कराएंगे शिक्षामित्र मामले की कानूनी लड़ाई में राज्य सरकार द्वारा की गई धोखेबाजी।*
जितना ज्यादा आप सभी इस पोस्ट को आप शेयर करेंगे उतना अधिक लोग इस सरकार के कोरे सफेद झूठ से वाकिफ होंगे।
मैंने अपना काम कर दिया अब आपकी बारी है।
*सभी साथियो से निवेदन की इस पोस्ट को फेसबुक पर वायरल करे।*
सिर्फ पढ़कर आगे न बढ़ जाये।
          *आकाश सिंह*

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